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VOL. 4, ISSUE 5 (2019)
न्यायिक अवमानना की अवधारणा न्यायपालिका के स्वतंत्रता का एक आधार
Authors
राधा विश्नोई
Abstract
न्यायपालिका प्रजातांत्रिक व्यवस्था का प्रमुख आधार स्तम्भ होता है। समाज में न्याय व्यवस्था सुचारू रूप से चलाने के लिए न्यायपालिका का पूर्णतया स्वतंत्र होना आवश्यक है । न्यायपालिका की स्वतंत्रता काफी सीमा तक न्यायाधीशो के निर्णयो, आदेशों व विचार पद्वति पर निर्भर करती है। न्यायाधीश जब बिना किसी भय से अपने न्यायिक कर्तव्यो का निर्वहन करेंगे तभी निष्पक्ष न्याय हो पाएगा न्यायालय की स्वतंत्रता को प्रभावित करने वाले कुछ मुख्य तत्व जिसमें न्यायाधीशो की नियुक्ति, वेतन-भतों स्थानान्तरण इत्यादि के प्रावधान है साथ ही न्यायाधीश स्वंतत्र काम इस कारण भी कर सकते है क्योंकि उन्हें पद से हटाने की प्रकिया जटिल व पेचिदा है। न्यायिक निर्णयों पर बाहरी राजनैतिक प्रभाव के कारण बहुत बार न्याय व्यवस्था की स्वतत्रता को प्रभावित होते हुए देखा गया है । यहीं कारण है कि विधि आयोग ने भी यह माना है कि सेवानिवृत न्यायधीशो का अन्य अध्यक्ष पदों पर नियुक्तियां भी न्यायपालिका की स्वतंत्रता में बाधक है।
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Pages:87-89
How to cite this article:
राधा विश्नोई "न्यायिक अवमानना की अवधारणा न्यायपालिका के स्वतंत्रता का एक आधार". International Journal of Advanced Research and Development, Vol 4, Issue 5, 2019, Pages 87-89
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