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VOL. 3, ISSUE 2 (2018)
हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की परंपरा
Authors
Suman Devi
Abstract
हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की एक सुदीर्घ परम्परा है। विद्वानों की सहमति है कि इस परम्परा का ‘टर्निंग पाॅइंट’ आचार्य शुक्ल का साहित्येतिहास लेखन में आना है। इतिहास लेखन की परंपरा को 2 रूपों में बांटा गया है- अनौपचारिक तथा औपचारिक। अनौपचारिक लेखन की शुरूआत 19वीं शताब्दी में हुई जिसमें भक्तमाल, कविमाला, कालिदास हजारा, आदि ग्रंथ शामिल हैं। औपचारिक इतिहास लेखन 1839 ई. में शुरू हुआ। आचार्य द्विवेदी के बाद कई विद्वानों ने साहित्येतिहास लेखन में गंभीर प्रयास किया है। ऐसे विद्वानों तथा उनके ग्रंथों की संक्षिप्त जानकारी नीचे बिंदुओं में दी गई है।
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Pages:223-225
How to cite this article:
Suman Devi "हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन की परंपरा". International Journal of Advanced Research and Development, Vol 3, Issue 2, 2018, Pages 223-225
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