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VOL. 3, ISSUE 2 (2018)
प्रेमचन्द के उपन्यासों में नारी संवेदना
Authors
मीतो देवी
Abstract
भारतीय समाज में महिलाओं पर अत्याचार होना कोई नई बात नहीं है जहाँ पुरुष वर्चस्व को बरकरार रखने के लिए हमेशा महिलाओं के स्वाभिमान और उनके जीवन की आहुति दी जा रही है। वह कभी अपने साथ हो रहे दुव्र्यवहार और अत्याचार के विरोध में अपनी आवाज़ नहीं उठा पाई क्योंकि कहीं न कहीं वह यह जानती थी कि रस पुरुष प्रधान समाज में उसकी बात कोई नहीं बुनेगा इसलिए अपने इसी जीवन को अपनी नियति मानती हुई वह सब कुछ सहन करना ही अपने और अपने परिवार के लिए बेहतर समझती थी।
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Pages:730-731
How to cite this article:
मीतो देवी "प्रेमचन्द के उपन्यासों में नारी संवेदना". International Journal of Advanced Research and Development, Vol 3, Issue 2, 2018, Pages 730-731
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