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VOL. 3, ISSUE 1 (2018)
राजा राममोहन राय का आधुनिक भारत के जनक के रूप में विश्लेषण
Authors
Dr. Sanjeet
Abstract
भारत के स्वाधीनता संघर्ष में राजा राममोहन राय का योगदान अविस्मरणीय है और अधिकांश बुद्धिजीवी और विद्वान उन्हें आधुनिक भारत का जनक कहकर सम्मान देते हैं। जिस समय राजा राममोहन राय ने समाज सुधार का बीड़ा उठाया तो उस समय हिन्दू धर्म विकृत और पथभ्रष्ट होने की कगार पर था। सर्वत्र बहुदेववाद और मूर्तिपूजा का बोलबाला था। सामाजिक एकता भी नष्ट हो चुकी थी और विदेशी आक्रमणों के कारण राजनैतिक हालात भी ठीक नहीं थे। इसलिए भारतीय दर्शन को आधार बनाकर राजा राममोहन राय ने एकेश्वरवाद की सत्ता पर बल दिया और घोर निराशा के वातावरण में डूबे भारतीय समाज को उभारने का बीड़ा उठाया। चूंकि परम्परावादी व रूढिवादी सोच के लोगों ने उन्हें कई बार चुनौती दी, फिर भी उन्होंने अपनी भावी रणनीति को अमलीजामा पहनाना जारी रखा। उन्होंने पत्रकारिता के माध्यम से भारतीय जनमानस की सेवा का निश्चय किया और अंग्रेजी भाषा को भारतीय हितों के अनुकूल बताय उनके प्रयासों से कई बार ब्रिटिश सरकार ने मताधिकार का विस्तार करने में भी रूचि दिखाई। सुरेन्द्रनाथ बैनर्जी ने तो उन्हें संवैधानिक आन्दोलन का जनक तक कहा है। प्रस्तुत शोध पत्र में राजा राममोहन राय के आधुनिक भारत के निर्माण में योगदान का विश्लेषण किया गया है।
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Pages:870-872
How to cite this article:
Dr. Sanjeet "राजा राममोहन राय का आधुनिक भारत के जनक के रूप में विश्लेषण". International Journal of Advanced Research and Development, Vol 3, Issue 1, 2018, Pages 870-872
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