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VOL. 3, ISSUE 1 (2018)
सूरदास की भक्ति भावना का दार्शनिक आधार
Authors
Amit Kumar Singh
Abstract
महाकवि सूरदास कृष्णभक्त कवियों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं। उनकी भक्ति भावना अन्य सभी कृष्ण भक्त कवियों में अत्यधिक प्रखर है। उनका भक्ति सम्बन्धी दृष्टिकोण स्थिर न होकर गतिशील रहा है। दास भक्ति से आरम्भ करके वे अन्ततः रागानुगा भक्ति जक पहुँचे। सूरदास की भक्ति का दार्शनिक आधार वल्लभाचार्य का ‘शुद्धाद्वैतवाद’ दर्शन है। वल्लभाचार्य वैष्णव वैदान्ती दार्शनिक हैं उनका शुद्धाद्वैतवाद एक प्रकार का अद्वैत ही है जिसमें शुद्ध शब्द का प्रयोग विशेषण रूप में किया गया है। शुद्धाद्वैतवाद के साथ-साथ सूरदास की भक्ति भावना पर पुष्टिमार्ग, मधवाचार्य के द्वैतवाद, निम्बार्क के द्वैताद्वैतवाद, चैतन्य महाप्रभु के अचिन्त्य भेदाभेदवाद तथा गोस्वामी हितहरिवंश के राधा वल्लभ संप्रदाय के दार्शनिक सिद्धान्तों का प्रभाव स्पष्ट दिखई देता है।
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Pages:704-705
How to cite this article:
Amit Kumar Singh "सूरदास की भक्ति भावना का दार्शनिक आधार". International Journal of Advanced Research and Development, Vol 3, Issue 1, 2018, Pages 704-705
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